शिक्षा सम्प्रत्यय तथा अर्थ (Concept and Meaning of Education)

इकाई 1 शिक्षा सम्प्रत्यय तथा अर्थ (Concept and Meaning of Education)

इकाई की रूपरेखा 1.0 उद्देश्य
प्रस्तावना । शिक्षा का सम्प्रत्यय तथा परिभाषा
1.2.1 भारतीय मत | 1.2.2 पाश्चात्य मत शिक्षा का अर्थ 1.3.1 शिक्षा का संकुचित अर्थ 1.3.2 शिक्षा का व्यापक अर्थ
1.3.3 शिक्षा का समन्वित अर्थ 1.4 शिक्षा की प्रकृति
1.4.1 शिक्षा: कला अथवा विज्ञान 1.5 शिक्षा के आधार
1.5.1 मनोवैज्ञानिक आधार 1.5.2 दार्शनिक आधार 1.5.3 समाज शास्त्रीय आधार
1.5.4 वैज्ञानिक आधार 1.6 शिक्षा में प्रयुक्त आधारभूत सम्प्रत्यय
1.6.1 अनुदेशन 1.6.2 विद्यालयीकरण 1.6.3 शिक्षण 1.6.4 प्रशिक्षण 1.6.5 अनुदेशन, विद्यालयीकरण प्रशिक्षण व शिक्षा में अन्तर
शिक्षा का जीवन में महत्व : शिक्षा आजीवन चलने वाली प्रक्रिया 1.8 सार-संक्षेप 1.9 मूल्यांकन प्रश्न 1.10 सन्दर्भ ग्रन्थ 1.0 उद्देश्य इस इकाई के अध्ययन के पश्चात् आप

1.2 शिक्षा का सम्प्रत्यय एवं परिभाषाएँ

शिक्षा के सम्प्रत्यय और परिभाषा को भारतीय एवं पाश्चात्य परिप्रेक्ष्य में समझना उपयुक्त रहेगा।
(i) भारतीय मत -शिक्षा शब्द संस्कृत की ‘शिक्षा’ धातु से निर्मित है जिसका अर्थ है। ‘सीखना’ । शिक्षा के लिए प्राचीन युग में ‘विद्या शब्द का प्रयोग भी किया जाता था । विद्या शब्द ‘विद्’ धातु से निर्मित है जिसका अर्थ है ‘जानना’ ।

विद्या का तात्पर्य है – ज्ञान । वेदों में कहा गया है कि विद्या वह ज्ञान है जिसे प्राप्त कर लेने के बाद और कुछ जान लेने को शेष नहीं रहता अर्थात् विद्या का अर्थ आत्म ज्ञान समझा जाता था । परिभाषाएँ
यजुर्वेद – “विद्यायामृतमश्नुते” अर्थात् विद्या से अमरत्व की प्राप्ति होती है । गीता – “सा विद्या या विमुक्तये” अर्थात् वही विद्या है जो कथन से मुक्त करावे । स्वामी विवेकानन्द – “शिक्षा मनुष्य में अन्तर्निहित पूर्णता की अभिव्यक्ति है ।” (Education is the manifestation of perfection already in man.)

रविन्द्रनाथ ठाकुर – “सर्वोच्च शिक्षा वह है जो हमें केवल सूचनाएं नहीं देती, अपितु हमारे जीवन व सम्पूर्ण सृष्टि में तादात्म्य स्थापित करती है ।” (The highest Education is that which does not merely gives us information but makes our life in harmony with all existence.)
अरविन्द – “बालक की शिक्षा उसकी प्रकृति में जो कुछ सर्वोत्तम, सर्वाधिक शक्तिशाली, सर्वाधिक अन्तरंग और जीवनपूर्ण है उसको अभिव्यक्ति करना होना चाहिए वह उसके अन्तरंग गुण और शक्ति का सांचा है ।”
| महात्मा गाँधी – “शिक्षा से मेरा तात्पर्य बालक और मनुष्य के शरीर मन तथा आत्मा के सर्वांगीण एवं सर्वोत्कृष्ट विकास से है ।’ (By Education | mean an all round drawing out of the best in child and man-body, mind and spirit.)
(ii) पाश्चात्य मत (Western view)-शिक्षा का अंग्रेजी पर्याय ‘Education’ शब्द है। जिसकी व्युत्पत्ति लेटिन भाषा के शब्द Educatum से हुई है | Education का शाब्दिक अर्थ या E = अन्दर से, Duco= बाहर निकालना-आगे बढ़ाना (To lead out) अर्थात् अन्दर की शक्तियों को बाहर की ओर विकसित करना ही शिक्षा है | Educare = एडुकेयर to lead out विकसित करना, निकालना, शिक्षित करना | Educare = एडुकेयर To educate, to bring up to raise आगे बढ़ना, बाहर निकालना, विकसित करना । यह अर्थ भारतीय मत के अनुकूल प्रतीत होता है । भारतीय एवं पाश्चात्य मत क्रमशः आध्यात्मिक एवं भौतिक दृष्टिकोण के परिचायक है किन्तु तात्विक रूप में उनमें अन्तर्विरोध नहीं है ।
| पाश्चात्य मत के अनुसार शिक्षा सम्बन्धी विचारों को तीन प्रमुख दार्शनिक विचाराधाराओं के अन्तर्गत वर्गीकृत कर देखना उचित होगा –

(1) आदर्शवादी दर्शन (Idealism) के अनुसार कुछ प्रमुख चिन्तकों द्वारा दी गई परिभाषाएँ निम्नांकित हैं

प्लेटो (Plato) – “शिक्षा का कार्य मनुष्य के शरीर और आत्मा को वह पूर्णता प्रदान करना है जिसके कि वे योग्य है ।” (Education consist in giving to the body and soul all the perfection of which they are suceptible.)
कॉमिनियस (Comenius) “शिक्षा द्वारा विकसित ज्ञान व्यक्ति में नैतिकता और धार्मिकता उत्पन्न करता है ।”
मिल्टन (Milton) – “शिक्षा का ध्येय परमात्मा के प्रति श्रद्धा उत्पन्न करना, आत्मा को उन्नत करना तथा दैवी कृपा से एकता सीखना ।”
पेस्टालॉजी (Pestalozi) – “शिक्षा मनुष्य की समस्त शक्तियों का स्वाभाविक, प्रगतिशील एवं सर्वमान्य विकास है ।” (Education is a natural harmonious and progressive development of man’s innate powers.)
एडम्स (Adams) – “शिक्षा वह पूर्व नियोजित प्रक्रिया है जिसमें एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के विकास हेतु विचारों का आदान-प्रदान करता है तथा ज्ञान के प्रबन्ध दवारा परिवर्तन करता है।”
अरस्तु (Aristotle) – “स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क का निर्माण ही शिक्षा है ।” (Education is the creation of a sound mind in a sound body.)
ब्राउन (Brown) – “शिक्षा चैतन्य रूप में एक नियन्त्रित प्रक्रिया है, जिसके द्वारा व्यक्ति के व्यवहार में परिवर्तन किये जाते हैं तथा व्यक्ति के द्वारा समाज में |”

(Education is the consciously controlled process whereby changes in behavior are produced in the person and through the person within the group.)।
रिऑरगेनिजेशन ऑफ सेकेण्डरी स्कूल्स रिपोर्ट (Report of the commission on the Reorganization of the Secondary School, U.S.A) – “शिक्षा का उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति के ज्ञान, रुचियों, आदर्शों, आदतों तथा शक्तियों का विकास करना है, जिसके द्वारा उसे अपना उचित स्थान प्राप्त हो सके तथा वह इस स्थान का सदुपयोग कर स्वयं तथा समाज को उच्च एवं पवित्र उद्देश्यों की ओर ले जाये ।”

(The purpose of education is to develop in each individual the Knowledge, interests, ideas, habits and powers whereby he will find his place to shape both himself and society towards nobler ends.)
काण्ट (Kant) – “शिक्षा व्यक्ति की क्षमतानुसार उसकी पूर्णताओं का विकास है ।”
हार्न (Horn) – “शिक्षा द्वारा मनुष्य प्रकृति, समाज तथा विश्व के अन्यतम स्वरूप से तादाक्य स्थापित करता है ।”
टी. पी. नन (T.P Nunn) – “शिक्षा मनुष्य के व्यक्तित्व का पूर्ण विकास है जिससे कि वह अपनी उच्चतम योग्यता के अनुसार मानव जीवन को मौलिक योगदान दे सके ।” (Education is the complete development of individuality so that he can make a original contribution to human life according to his best capacity.)
फिक्टे (Ficte) – “शिक्षा ईश्वरीय शिक्षा का अन्वेषण है ।” हर्बर्ट (Herbart) – “शिक्षा अच्छे नैतिक चरित्र का विकास है ।”
(Education is the development of good moral character.)

(2) प्रकृतिवादी दर्शन (Naturalism) के समर्थक कुछ प्रमुख शिक्षा शास्त्रियों ने शिक्षा को इस प्रकार परिभाषित किया है : रूसो (Roussau) – “शिक्षा जीवन है और उसका उद्देश्य व्यक्तित्व का उत्कर्ष करना है ।।

हर्बर्ट स्पेन्सर (Herbert Spencer) – “पूर्ण जीवन की प्राप्ति ही शिक्षा है ।” रॉस (Ross) – “शिक्षा बालक के स्वाभाविक तथा प्राकृतिक गुणों का विकास करती है ।”

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