हण्टर कमीशन ने माध्यमिक शिक्षा के पाठ्यक्रम सुधार के लिए क्या सुझाव दिये।

हण्टर कमीशन ने माध्यमिक शिक्षा के पाठ्यक्रम सुधार के लिए क्या सुझाव दिये।

अतिअल्प थी । अत: आयोग ने सुझाव दिया कि यह धनराशि केवल प्राथमिक शिक्षा के विकास पर ही व्यय की जाय ।। प्राथमिक विद्यालयों के अध्यापकों का प्रशिक्षण
आयोग की राय थी कि प्राथमिक विद्यालयों के लिए प्रशिक्षित अध्यापकों की आवश्यकता है । इस लिए प्रशिक्षण महाविद्यालयों की व्यवस्था की जाय । प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षण स्तर को उँचा उठाने के लिए आयोग ने अध्यापकों के प्रशिक्षण पर बल दिया । और जगह जगह नॉरमल स्कूल (Normal School) खोलने की सिफारिश की । आयोग ने प्राथमिक विदयालयों के अध्यापकों के प्रशिक्षण के सम्बन्ध में निम्न लिखित सुझाव दिये

1. नॉरमल विद्यालयों की स्थापना ऐसे स्थल पर की जाय जहाँ अधिकाधिक प्राथमिक विद्यालयों की स्थानीय आवश्यकताओं की पूर्ति हो, चाहे वे राजकीय या अनुदानित विद्यालय हो ।

2. नॉरमल विद्यालयों की उन्नति के लिए अपने अधीन नॉरमल विद्यालयों में निरीक्षक रूचि ले’ तथा छात्रों में शिक्षण के प्रति प्रेरणा उत्पन्न करें ।

3. प्राथमिक विद्यालयों पर व्यय करने के लिए जो धनराशि निश्चित की जाय उस पर नॉरमल विद्यालय का पूर्ण नियन्त्रण हो । अध्ययन के लिए पाठ्यक्रम आयोग ने पाठ्यक्रम के सम्बन्ध में सुझाव दिया कि प्रत्येक प्रान्त स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अपने पाठ्यक्रम निश्चित करें । साथ ही आयोग ने व्यावहारिक जीवन में उपयोगी विषयों जैसे – कृषि, चिकित्सा, बहीखाता, क्षेत्रमीति (field book) शारीरिक विज्ञान, आदि विषयों के शिक्षण पर बल दिया ।

देशी पाठशालाएँ

देशी पाठशालाओं का आयोग ने विशेष अध्ययन किया । इन पाठशालाओं में करोड़ों बालक बालिकाओं को पंडितों और मोलवियों के द्वारा शिक्षा दी जा रही थी । इसके महत्व को स्वीकार करते हुए आयोग ने लिखा “यह अतिकठिन संघर्ष के बाद भी जीवित है और इस प्रकार इन्होंने सिद्ध किया कि इनमें शक्ति और लोकप्रियता दोनों है । यदि देशी विद्यालयों को मान्यता और सहायता दी जाय तो यह आशा की जाती है कि वे अपने शिक्षण विधि में सुधार कर लेंगे और राष्ट्रीय शिक्षा की राज्य प्रणाली में लाभप्रद स्थान ग्रहण करेंगें ।” “Admitting hower ever Comparative inferiority of indigenous Institution they consider that efforts should now be made to encourage them. They have survived competitions and have thus proved that prossess both Vitatily and popularity.”
| देशी पाठशालाओं के महत्व को ध्यान में रखते हुए आयोग ने निम्नलिखित सुझाव प्रस्तुत किए ।

1. सभी देशी पाठशालाओं को सरकार द्वारा प्रोत्साहित किया जाय ।

2. पाठशालाओं में प्रवेश देने वाले छात्रों पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध न लगाया जाय ।।

3. निर्धन छात्रों को छात्रवृत्तियाँ प्रदान की जाय ।
4. देशी पाठशालाओं का संचालन एवं भार नगरपालिका एवं जिला परिषद को सौपा जाय । परन्तु पाठशालाओं को इन संस्थाओं के अन्तर्गत रहने या न रहने की पूर्ण स्वतन्त्रता प्रदान की जाय ।

5. देशी पाठशालाओं के अध्यापकों के प्रशिक्षण की पूर्ण व्यवस्था की जाय ।

स्वमूल्यांकन प्रश्न

भारत में प्राथमिक शिक्षा के विकास पर प्रकाश डालिए |

हंटर कमीशन के प्रमुख उद्देश्य क्या थे ।

हंटर कमीशन के अनुसार प्राथमिक विद्यालयों के अप्रशिक्षित अध्यापकों को कैसे प्रशिक्षित किया जा सकता है।

 माध्यमिक शिक्षा

माध्यमिक शिक्षा माध्यमिक शिक्षा के बारे में आयोग ने केवल दो सुझाव दिये –

1. माध्यमिक शिक्षा का प्रसार करने के उपाय |
2. माध्यमिक शिक्षा के दोषों को दूर करने के उपाय ।

सुझाव –

1. आयोग का सुझाव था कि सरकार को चाहिये कि माध्यमिक शिक्षा को योग्य एवं
बुद्धिमान भारतीयों के हाथों सौंप कर स्वयं उसके दायित्व से मुक्त हो जायें ।

2. यदि किसी क्षेत्र में अंग्रेजी शिक्षा के लिए माध्यमिक विद्यालयों की स्थापना आवश्यक
प्रतीत हो तो उन्हें सहायता/अनुदान (Grant in aid) प्रणाली पर स्थापित किया जाय ।

3. जिस क्षेत्र की जनता नवीन स्कूल खोलने में असमर्थ हैं वही सरकार द्वारा विद्यालय
खोले जायें, परन्तु एक जिले में एक से अधिक विद्यालय न खोले जायें ।

4. सरकारी विद्यालयों को धीरे धीरे प्राइवेट विद्यालय में परिवर्तित कर दिया जाय ।।

5. वे प्राइवेट विद्यालय जिन्हें सरकार मान्यता प्रदान कर चुकी है, उन्हें सरकारी । विद्यालयों के समान माना जाय ।।

6. प्राइवेट माध्यमिक विद्यालयों को ठीक तरह से चलाने के लिए आयोग ने सिफारिश की
कि यदि वे चाहे तो अपने विद्यालय को लोकप्रिय बनाने के लिए राजकीय विद्यालयों
से कम शुल्क ले सकते हैं ।

पाठ्यक्रम

माध्यमिक शिक्षा में कमियों को दूर करने के लिए आयोग ने महत्वपूर्ण सुझाव दिया । आयोग ने सुझाव दिया कि हाई स्कूल के पाठ्यक्रम को दो भागों में विभाजित किया जाय :1. ‘अ कॉर्स’ (A Course) उन छात्रों के लिए हो जो विश्वविद्यालय शिक्षा के प्रति उत्सुक हों और उच्च अध्ययन करना चाहते हों ।।
2. ‘ब कॉर्स’ (B Course) यह कॉर्स अधिक व्यावहारिक हो और इसका उद्देश्य नव युवकों को व्यावहारिक तथा असाहित्यिक (Non literary) कार्यो के लिए तैयार करना हो ।
जिससे हाई स्कूल की शिक्षा समाप्त करने के पश्चात् वे कोई व्यवसाय अपना सके ।

नॉरमल स्कूल

1882 तक भारतवर्ष में मात्र 2 नॉरमल स्कूल थे । एक लाहोर में दूसरा मद्रास में । आयोग ने अध्यापकों के प्रशिक्षण पर विशेष बल दिया और निम्नांकित सिफारिशें की ।

1. स्नातकों का प्रशिक्षण काल उनसे निम्न योग्यता वाले छात्राध्यापकों की अपेक्षा कम होना चाहिए।

2. प्रशिक्षण विद्यालयों के पाठ्यक्रम में शिक्षा सिद्धान्त एवं अध्यापन अभ्यास में दक्ष होने | पर उन्हें स्थायी नियुक्ति दी जाय ।।

स्वमूल्यांकन प्रश्न

माध्यमिक शिक्षा के विकास में हण्टर कमीशन की सिफ़ारिशें क्या थी?

2. हण्टर कमीशन के सक्षम माध्यमिक शिक्षा के प्रमुख विचारधीन बिन्दु क्या थे, 

8.6 उच्च शिक्षा

भारतीय शिक्षा आयोग का मुख्य उद्देश्य प्राथमिक शिक्षा की स्थिति की जांच का सुझाव देना था | परन्तु फिर भी उसने विश्वविद्यालय शिक्षा के विषय में महत्वपूर्ण सुझाव इस प्रकार दिये :

1. कॉलेजो को अनुदान स्वरूप दी जाने वाली धन राशि, उनके समस्त व्यय, अध्यापकों की संख्या उनकी कार्य कुशलता और स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर निश्चित की जानी चाहिए।

2. महाविद्यालय के भवन निर्माण, पुस्तकालय, प्रयोगशालाओं एवं शिक्षण सामग्री के लिये धन की आवश्यकता होने पर सरकार द्वारा इन कार्यों की पूर्ति के लिये विशेष अनुदान दिया जाए ।

3. महाविद्यालय के पाठ्यक्रम का विस्तार किया जाय जिसमें छात्र अपनी रूचि अनुसार विषयों का चयन कर सकें ।

4. अच्छे एवं योग्य विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिये विदेशों में भेजा जाय।

5. छात्रों के नैतिक उत्थान के लिये एक ऐसी पुस्तक की रचना की जाय जिसमें प्रमुख

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