हंटर आयोग का माध्यमिक शिक्षा मे सुधार के लिए क्या क्या योगदान दिया?

हंटर आयोग का माध्यमिक शिक्षा मे सुधार के लिए क्या क्या योगदान दिया?

माध्यमिक स्तरों पर बड़े पैमाने पर विस्तार करना होगा । प्राथमिक व माध्यमिक स्तर की शिक्षा के लिये काफी संवर्धित खर्च की आवश्यकता है । ऊपर से नीचे के स्तर तक सरकारी निधियों के लचीले वितरण व स्थानीय प्रबन्ध को अधिक स्वायत्तता प्रदान की जानी चाहिये । निजी स्कूलों की मान्यता, सरकार से रच-वित्त पोषी स्कूलों को सहायता व स्कूल प्रबन्धक वर्ग की क्षमता हेतु पारदर्शी, मानदण्ड आधारित सरल क्रियाविधियाँ होनी चाहिये । साक्षरता मिशन पर व्यय बढ़ाया जाना चाहिये । स्कूल पूर्व शिक्षा सर्व सुलभ बनाई जानी चाहिये । स्कूल व स्कूल आयु के बच्चों के बारे में पूर्ण डाटा आधार का निर्माण किया जाना चाहिये । अधिगम उपलब्धियों के लिये न्यूनतम मानकों की प्राप्ति सुनिश्चित करने के लिये सरकारी व निजी स्कूलों की गुणवत्ता की मॉनीटरिंग करने के लिये एक राष्ट्रीय निकाय बनाया जाना चाहिये । स्कूल निरीक्षण की प्रणाली में स्थानीय हितधारकों की भूमिका को बढ़ाना व चुस्त बनाया जाना चाहिये। साथ ही राष्ट्रीय ज्ञान आयोग ने रट्टा लगाकर सीखने से हटकर अवधारणाओं की गहरी समझ व योग्यता में सुधार की तरफ बढ़ते हुए पाठ्यचर्या और परीक्षा प्रणालियों में सुधार सम्बन्धी सिफारिशें भी दी हैं ।

9. व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण:

रा.ज्ञा.आ व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण को देश की शिक्षानीति का एक महत्वपूर्ण अंग मानता है देश की बदलती स्थिति में व युवा आबादी का लाभ उठाने की दृष्टि से व्यावसायिक शिक्षा में तत्काल सुधार आवश्यक है जैसे –
व्यावसायिक शिक्षा को पूरी तरह मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय के अंतर्गत रखना। व्यावसायिक शिक्षा का प्रभाव मापना, उसकी निगरानी करना, शिक्षा व प्रशिक्षण में लचीलापन लाना।। वर्तमान ढाँचे को मजबूत करना व शिक्षा के लिये संसाधनों का आवंटन करना । नवाचारी आपूर्ति मॉडलों के माध्यम से जिनमें सशक्त सरकारी व निजी भागीदारी शामिल है। इनकी क्षमता में वृद्धि पर बल हमारी अधिकांश कामकाजी आबादी की उत्पादकता बढ़ाने की दृष्टि से असंगठित तथा अनौपचारिक क्षेत्र के लिये उपलब्ध प्रशिक्षण विकल्पों का संवर्धन महत्वपूर्ण होगा । व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण को समुचित प्रमाणन सहित एक मजबूत नियामक व प्रत्यायन तंत्र सुनिश्चित करना जरूरी

10. उच्च शिक्षा :

उच्चतर शिक्षा में राष्ट्रीय ज्ञान आयोग की सिफारिशें विस्तार, उत्कृष्टता,  समावेशन – इन तीनों पक्षों की ओर केन्द्रित है । विस्तार हेतु 2015 तक 1500 विश्वविद्यालय, 50 राष्ट्रीय विश्वविद्यालय, खोले जाने चाहिये । उत्कृष्टता हेतु मौजूदा विश्वविद्यालयों में सुधार, अवर स्नातक कॉलेजों का ढाँचा बदलना, प्रवेश की बाधाओं को कम करने हेतु एक स्वतंत्र विनियामक प्राधिकरण की स्थापना की सिफारिश की है। पाठ्यचर्या संशोधन, पाठ्यक्रम क्रेडिट प्रणाली, आंतरिक मूल्यांकन पर अधिक विश्वास करना, संस्थान के अभिशासन में सुधार, सामुदायिक कॉलेजों के मॉडलों के सृजन की सिफारिश भी की है । समावेशन की दृष्टि से रोजगारोन्मुख कार्यक्रम सभी योग्य विद्यार्थियों को शिक्षा सुलभ होनी चाहिये भले ही उनकी सामाजिक, आर्थिक स्थिति कैसी भी हो ।

11. गणित व विज्ञान में अधिक प्रतिभाशाली छात्र :

देश में गणित व विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान में नवीनीकरण करने के लिये राष्ट्रीय ज्ञान आयोग की सिफारिश है कि गणित तथा विज्ञान की शिक्षा हेतु अधिक संख्या में विद्यार्थियों को आकृष्ट किये जाने की आवश्यकता है । इस हेतु मौजूदा अधिकारिक तंत्र का स्तरोन्नयन एवं विस्तार हेतु निवेश बढ़ाने, संसाधनों का आदान-प्रदान, सभी स्तरों पर अध्यापक प्रशिक्षण को उत्तम गुणवत्तायुक्त बनाने, मूल्यांकन प्रणाली में आधारभूत बदलाव, स्वायत्तता, छात्रवृत्तियाँ, पाठ्यचर्या में बदलाव व विश्वस्तरीय सुधार, अनुसंधान के अवसरों में बढ़ोतरी, उत्तम विज्ञान शैक्षिक सामग्री की सर्वसुलभता को बढ़ाना आदि सिफारिशें प्रस्तुत की । रा.शा.आ. ने एक विशाल विज्ञान आउटरीच कार्यक्रम शुरू किये जाने की भी सिफारिश की है ।।

12. विधिक शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, प्रबंधन शिक्षा, इंजीनियरिंग शिक्षाः राष्ट्रीय ज्ञान आयोग ने पेशेवर शिक्षा जैसे विधिक, चिकित्सा, प्रबंधन व इंजीनियरिंग शिक्षा हेतु मौजूदा विनियामक तंत्र में सुधार अथवा इनके स्थान पर स्थायी स्वायत्त समितियों की स्थापना की सिफारिश की है । ऐसी स्वतंत्र एजेन्सियाँ भी विकसित की जानी चाहिये जो विश्वसनीय रेटिंग उपलब्ध कराती हैं । पेशेवर शिक्षा में पाठ्यचर्या में सुधार एवं विकास, अनुसंधानों में वृद्धि मौजूदा परीक्षा प्रणाली में सुधार, संस्थानों को अधिक स्वायत्तता प्रदान करने, क्षेत्रीय संतुलन, प्रतिभा सम्पन्न संकाय को आकर्षित करने, अन्र्तराष्ट्रीयकरण करने हेतु अधिक वित्तीय व्यवस्था करने सम्बन्धी सिफारिश दी दें ।

13. मुक्त और दूरस्थ शिक्षा तथा मुक्त शैक्षिक संसाधन :उच्च शिक्षा में प्रवेश लेने वाले छात्रों में से 1/5 से अधिक विद्यार्थी मुक्त व दूरस्थ शिक्षा के हैं । रा.जा.आ. ने इस हेतु एक राष्ट्रीय आईसीटी आधिकारिक तंत्र का सृजन करने, विनियामक तंत्रों में सुधार लाने, वेब आधारित साझा मुक्त संसाधन विकसित करना, क्रेडिट बैंक स्थापित करना, राष्ट्रीय परीक्षण सेवा उपलब्ध कराना, अनुसंधान लेखा पुस्तकों, पत्रिकाओं आदि की मुक्त सुलभता संबंधी सिफारिशें दी हैं ।

14. अधिक उत्तम पी.एच.डी. : देश में अनुसंधान और विकास का कायाकल्प करने के लिये राजाआ ने पी.एच.डी. के स्तर में सुधार लाने के उपायों की सिफारिश की है । आयोग ने विश्वविद्यालय प्रणाली के नवीनीकरण, सुधार, अनुसंधान में वैश्विक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने, शिक्षा व अनुसंधान के प्रत्येक स्तर पर व्यापक निवेश किये जाने की सिफारिश की है । विभिन्न विषय क्षेत्रों में डॉक्टरल कार्यक्रमों का नवीनीकरण करने, शैक्षिक अनुसंधानों में गुणवत्ता को सुनिश्चित करने तथा एक राष्ट्रीय अनुसंधान मिशन स्थापित करने की सिफारिश की है जो कि देश के भीतर अपेक्षित अनुसंधान पारिस्थितिकी प्रणाली का सृजन करेगा ।

15. राष्ट्रीय विज्ञान और सामाजिक विज्ञान फाउण्डेशन सृजन :भारतीय अनुसंधान में मौजूदा संकट जैसे परस्पर सम्पर्क का अभाव, दूरदृष्टि का अभाव पारिश्रमिक में भिन्नता का अभाव, वैज्ञानिक विधियों का अभाव आदि को देखते हुए व उपलब्ध समूचे ज्ञान को सुसम्बद्ध करने के लिये व ज्ञान की प्रक्रिया की निरन्तरता को समझते हुए रा.ज्ञा.आ. ने एक राष्ट्रीय विज्ञान और सामाजिक विज्ञान फाण्डेशन की स्थापना की सिफारिश की है । इस फाउण्डेशन का उद्देश्य ऐसे सुझाव व नीतिगत पहलें देना होगा जो भारत को प्राकृतिक, भौतिक, कृषि, स्वास्थ्य, समाज विज्ञान के सभी क्षेत्रों में नये ज्ञान का सृजन और उपयोग करना, लोगों का जीवन स्तर सुधारने में विज्ञान व तकनीकी का अधिकतम उपयोग बताना, वैज्ञानिक सोच विकसित करना होगा जिससे भारत को विश्वगुरू के पद पर पुनः आसीन किया जा सके ।

16. सरकारी वित्तपोषित अनुसंधान के लिये कानूनी तंत्र : राष्ट्रीय ज्ञान आयोग ने ऐसा कानून बनाए जाने की सिफारिश की है जो कि सरकारी वित्तपोषित अनुसंधान के लिये एक समान कानूनी तंत्र का सृजन करे और विश्वविद्यालयों तथा अनुसंधान संगठनों को स्वामित्व और पेटेंट अधिकार उपलब्ध करायें। इससे लाइसेंस व्यवस्था द्वारा आविष्कर्ताओं को रायल्टी का एक हिस्सा प्राप्त होगा, आविष्कारों के वाणिज्यीकरण का वातावरण बनेगा । विश्वविदयालय को स्वामित्व अधिकार प्रदान किये जाने और इस तरह के स्वामित्व को पेटेंट प्रणाली और बाजार के साथ जोड़ने से अनुसंधान और अधिक आकर्षक बन जायेगा । इससे भारत के अनुसंधान परिदृश्य में जबरदस्त बदलाव आयेगा |

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