माध्यमिक शिक्षा आयोग ने परीक्षा और मूल्यांकन पर क्या संस्तुति दी ?

माध्यमिक शिक्षा आयोग ने परीक्षा और मूल्यांकन पर क्या संस्तुति दी ?

प्रत्येक छात्र के लिए 10 वर्गफुट जगह अवश्य हों ।

4. प्रत्येक कक्षा में कम से कम 30 और अधिक से अधिक 40 छात्रों को प्रवेश दिया जाए । विद्यालय में छात्रों की कम से कम संख्या 500 और अधिक से अधिक 750 रखी जाए |

5. विद्यालयों के फर्नीचर और अन्य शिक्षण सामग्री में सुधार करने के लिए अनुसंधान | किया जाए, जिससे उनको भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल बनाया जा सके ।

6. भविष्य में जिन नवीन विद्यालयों का संचालन किया जाए, उनमें विभिन्न पाठ्यक्रम की व्यवस्था की जाए ।

(य) कार्य के घण्टे और छुट्टियाँ

1. विद्यालय में कार्य करने के घण्टों को निश्चित करते समय स्थानीय परिस्थितियों,
व्यावसायिक दशाओं और मौसम आदि को ध्यान में रखा जाए । इस संबंध में विद्यालय के अधिकारियों को पर्याप्त स्वतंत्रता दी जाए ।
2. विद्यालय में 1 वर्ष में कम से कम 200 दिन और सप्ताह में कम से कम 35 घण्टे अध्यापन कार्य किया जाए | घण्टों की अवधि 45 मिनट रखी जाए । 3. विद्यालय सप्ताह में 6 दिन तक लगातार खोले जाए । इनमें से एक दिन आधे समय तक पढ़ाई की जाए और शेष समय में शिक्षकों और छात्रों द्वारा एक साथ मिलकर अतिरिक्त पाठ्य क्रियाओं का आयोजन किया जाएँ । सामान्य रूप से गर्मियों में दो माह की छुट्टी दी जाए । इसके अतिरिक्त, एक वर्ष में दो बार उपयुक्त अवसरों पर 10 से 15 दिन की छुट्टियाँ दी जाए | यह आवश्यक नहीं है कि विद्यालयों में सरकर द्वारा घोषित छुट्टियाँ दी जाये ।

आयोग ने अपने सुझावों द्वारा माध्यमिक शिक्षा के प्रशासन से सम्बन्ध रखने वाली प्राय: प्रत्येक समस्या का समाधान किया । उसने प्रशासन का बहुत बड़ा भार शिक्षा संचालक पर रखा और यह सुझाव दिया कि उसका मंत्री से सीधा सम्पर्क हों, जिससे की किसी भी समस्या को विचार-विमर्श के बाद सुलझाया जा सके ।

आयोग ने विद्यालयों की प्रबन्ध समितियों पर अनेक अंकुश लगा दिए ताकि वे अपनी मनमानी न कर सकें । इसके अलावा आयोग ने विद्यालय भवन के कमरों का क्षेत्रफल भी निश्चित कर दिया, जिससे विद्यार्थियों को कोई कठिनाई न हो । आयोग ने कार्य के घण्टों व छूटियां निश्चित करके छात्रों व अध्यापकों के हित की बात की है ।।

वित्त व्यवस्था

आयोग इस बात से अनभिज्ञ नहीं था कि उसके सुझावों को क्रियान्वित करने के लिए धन सबसे बड़ी आवश्यकता होगी । इस बात को ध्यान में रखते हुए आयोग ने ऐसे कुछ साधन बताए, जिनसे माध्यमिक शिक्षा के लिए धन प्राप्त किया जा सकें । यह सुझाव निम्नलिखित सुझाव हैं :1. माध्यमिक शिक्षा के सुधार और पुर्नगठन के लिए केन्द्र और राज्यों में घनिष्ठ सम्पर्क स्थापित किया जाए ।

2. व्यावसायिक शिक्षा की उन्नति के लिए केन्द्रीय स्तर पर ‘व्यावसायिक शिक्षा परिषद का निर्माण किया जाए, जिसमें संबंधी मंत्रालयों और दूसरे व्यवसायों के प्रतिनिधि हो ।

3. माध्यमिक स्तर पर व्यावसायिक तथा प्राविधिक शिक्षा की उन्नति के लिए ‘औद्योगिक शिक्षा कर’ लगाया जाए |

4. राष्ट्रीय उद्योगों जैसे- रेल, संचार, तार और डाक आदि से होने वाली आय का कुछ भाग ‘प्राविधिक शिक्षा’ के विकास के लिए व्यय किया जाए ।

5. माध्यमिक शिक्षा के विकास के लिए दिये जाने वाले धन पर आयकर न लगाया जाए ।

6. धार्मिक संस्थाओं और खैरातखानों के बचे हुए धन को माध्यमिक शिक्षा पर व्यय किया जाए |

7. शिक्षा संस्थाओं से संबंधित सम्पतियों को कर मुक्त किया जाए ।

8. केन्द्र और राज्य सरकारों द्वारा जहां सम्भव हो वहाँ स्कूलों को खेल के मैदान, विद्यालयों के कृषि फार्म, इमारतें एवं अन्य आवश्यक कार्यों के लिए निःशुल्क भूमि देनी चाहिए ।
आयोग ने माध्यमिक शिक्षा के पुनर्गठन में होने वाले व्यय की पूर्ति करने के लिए अनेक साधन बताए । आयोग का यह सुझाव उतम है कि धार्मिक संस्थानों के बचे हुए धन को माध्यमिक शिक्षा पर व्यय किया जाए | क्योंकि यह धन व्यर्थ ही पड़ा रहता है । आयोग का यह सुझाव भी प्रशसनीय है कि माध्यमिक शिक्षा का उतरदायित्व केन्द्रीय सरकार अपने ऊपर ले । संविधान ने प्रत्येक नागरिक को 14 वर्ष की आयु तक अनिवार्य शिक्षा का मौलिक अधिकार दिया है । इससे स्पष्ट हो जाता है कि केन्द्रीय सरकार माध्यमिक शिक्षा के कुल उतरदायित्व को राज्य-सरकारों पर नहीं डाल सकती है उसे कुछ उतरदायित्व अपने ऊपर लेना होगा ।

स्वमूल्यांकन प्रश्न

2. माध्यमिक शिक्षा आयोग ने विद्यालय में प्रशासन की समस्याओं पर क्या
सिफारिशें दी? माध्यमिक शिक्षा आयोग की अध्यापकों के विकास पर क्या सिफारिशें थी?
15.10 आयोग की संस्तुतियों का मूल्यांकन
स्वतंत्र भारत में माध्यमिक शिक्षा आयोग माध्यमिक शिक्षा की जाँच करने एवं सुधार देने के लिए गठित प्रथम शिक्षा आयोग है । आयोग ने माध्यमिक शिक्षा से सम्बन्धित सभी पहलुओं का बड़ी सूक्ष्मता से अध्ययन किया । तत्पश्चात् माध्यमिक शिक्षा में सुधार एवं पुर्नगठन हेतु उपयोगी सुझाव एवं संस्तुतियाँ प्रस्तुत की । आयोग द्वारा प्रस्तुत संस्तुतियों की निम्नलिखित विशेषताएँ है1. आयोग ने माध्यमिक शिक्षा का सूक्ष्म अध्ययन करके उसमें व्याप्त दोषों का निर्भिकता से उल्लेख किया । उनमें सुधार हेतु सुझाव देकर आयोग ने उसे दोषमुक्त बनाने का प्रयास किया । आयोग ने देश की वर्तमान आवश्यकताओं एवं जन आकांक्षाओं के अनुरूप माध्यमिक शिक्षा के उद्देश्यों का निर्धारण किया ।

3. आयोग ने माध्यमिक शिक्षा को एक पूर्ण इकाई मानते हुए उसके लिए नवीन संगठनात्मक संरचना का प्रयास किया ।

4. आयोग ने देश के औद्योगिक विकास को गति देने के लिए तकनीकी शिक्षा पर विशेष बल दिया ।

5. आयोग ने देश की भाषा समस्या के सम्यक् समाधान हेतु भाषाओं के अध्ययन पर सुझाव प्रस्तुत किया ।
6. आयोग ने माध्यमिक शिक्षा के तत्कालीन पाठ्यक्रम को दोषपूर्ण बताते हुए उसकी आलोचना की ओर वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप विभिन्नीकृत पाठ्यक्रम भी सिफारिश की ।

7. आयोग ने इस स्तर पर माध्यमिक शिक्षा का व्यावसायीकरण करने का भी सुझाव दिया और इसके लिए विभिन्न व्यावसायिक विषयों की शिक्षा पर विशेष बल दिया ।

8. आयोग ने व्यावसायिक विषयों की शिक्षा की समुचित व्यवस्था हेतु बहुउद्देशीय विद्यालयों की स्थापना का सुझाव दिया ।

9. आयोग ने पाठ्यपुस्तकों एवं शिक्षण विधियों में सुधार करने के लिए विशेष बल दिया ताकि माध्यमिक शिक्षा में शिक्षण का स्तर उन्नत हो सके ।

10. आयोग ने छात्रों में चारित्रिक विकास एवं अनुशासन हीनता के निवारण हेतु व्यापक

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