भारतीय समाज की विशेषताएँ बताइये ?

भारतीय समाज की विशेषताएँ बताइये ?

छात्रों में बंधुत्व की भावना का विकास किया जाना चाहिए । शिक्षण संस्थाओं में जो छात्र अलग-अलग क्षेत्रों से आते है इन सभी में परस्पर बंधुत्व का भाव रहे, विद्यालयों को इसका प्रयास करना होगा । बंधुत्व की भावना के द्वारा सहयोग एवं सहकारिता की भावना का विकास होता है यदि बालक में सकारात्मक मूल्यों जैसे सहयोग एवं सौहार्द्र होगा तो इसका प्रभाव समाज पर भी पड़ेगा । यदि हम अपने देश को प्रगति के रास्ते में आगे बढ़ाना है तो निश्चित रूप से शिक्षा को ही सक्रिय भूमिका निभानी होगी ।

5. धर्म निरपेक्षता (Secularism)

हमारा देश एक धर्म प्रधान देश है वैदिककाल से लेकर आधुनिक काल तक धर्म ही भारतीय समाज को प्रभावित करता रहा है | इस देश में विभिन्न धर्मों को मानने वाले लोग रहते है। ऐसी स्थिति में किसी विशेष धर्म की शिक्षा प्रदान किया जाना उचित है अथवा नही, यह एक विचारणीय प्रश्न है । डी. राधाकृष्णन का मानना है कि, ‘ ‘यदि धर्म को शिक्षा से अलग कर दिया जाये तो राक्षसी राज्य हो जायेगा । ” महात्मा गांधी के शब्दों में “धर्म विहीन शिक्षा अन्ततः निरर्थक सिद्ध होती है ।”
| धर्म व्यक्तिगत होता है जबकि नैतिकता का संबंध समाज के साथ व्यक्ति से भी होता है । यदि व्यक्ति धार्मिक सिद्धान्तो का निष्ठा से पालन करता है तो उसके मन में प्राणिमात्र के प्रति करूणा, प्रेम, सहकारिता, सहयोग तथा अन्याय के विरूद्ध लड़ने की क्षमता का विकास होता है । विद्यालयों में धार्मिक शिक्षा देने का औचित्य – छात्रों के दृष्टिकोण को व्यापक बनाना, शारीरिक एवं मानसिक दृष्टि से स्वस्थ रहने की प्रेरणा देना, छात्रों को नैतिकतापूर्ण व्यवहार करने के लिए प्रेरित करना, छात्रों में राष्ट्र के प्रति प्रेम उत्पन्न करना है ।। स्वमूल्यांकन प्रश्न
1. भारतीय समाज का वर्गीकरण कीजिए ।

2. भारतीय समाज के मूलभूत आदर्श बताइये ।।
3. सामाजिक न्याय पर टिप्पणी लिखिए ।

 भारतीय समाज का समकालीन दृश्य

समकालीन भारतीय समाज से आशय उस समाज से है जिसका निर्माण स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् प्रारंभ हुआ । भारतीय समाज का निर्माण कई संस्कृतियों के संयोग से हुआ है । विदेशी परम्पराएं भारतीय जीवन का अंग उसी स्थिति में बन पाती है, जब उनको भारतीय जीवन के आदर्शों के अनुरूप ढाल लिया जाता है।

भारतीय समाज की विशेषताएँ

आधुनिक भारतीय समाज के मूल्य, रहन-सहन एवं विश्वास किसी विशेष संस्कृति के प्रतीक न होकर सभी संस्कृतियों के समन्वय का परिणाम है | भारतीय समाज सदैव समस्यात्मक संस्कृति पर आधारित रहा है इसलिए यहां एकता के साथ-साथ विविधताएँ भी दिखायी पड़ती है । भारतीय समाज में संयुक्त रूप में पारिवारिक दायित्वों को पूरा करना होता है । व्यक्ति को व्यक्तिगत स्वार्थों से हटकर परोपकारी बनाने की दृष्टि से भारतीय सामाजिक व्यवस्था की गयी है । अर्थात् समकालीन भारतीय समाज को समझने के लिए भारतीय समाज
की आधारभूत विशेषताओं को जानना आवश्यक है ।

भारतीय समाज की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार है :
1. विभिन्न संस्कृतियों का समन्वय ।

2. विविधताओं का प्रारूप ।

3. संयुक्त परिवार व्यवस्था ।

4. आश्रम व्यवस्था ।

5. वर्ण व्यवस्था ।

6. धर्म का महत्व ।
अर्थात् समकालीन भारतीय समाज इन सभी विशेषताओं को अपने में समाये हुए है ।।

भारतीय समाज की वर्तमान स्थिति

15 अगस्त, सन् 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ और भारत में समाजवादी जनतंत्र की स्थापना हुई । समाजवादी लोकतंत्रीय व्यवस्था उसी समय सफल हो सकती है जब शिक्षा उसे सुदृढ बनाने में सहयोग प्रदान करे । वर्तमान में भारतीय समाज अपनी समस्याओं से जूझ रहा है वर्तमान भारतीय समाज में निम्न लिखित कमियाँ है:
1. बेरोजगारी 2. निर्धनता 3. निम्न जीवन स्तर 4. उच्च आकांक्षाएँ 5. धर्म में विश्वास की कमी 6. उच्च पदो के लिए स्पर्धा 7. संयुक्त परिवार का विघटन 8. बाल विवाह तथा दहेज प्रथा 9. विघटनकारी प्रवृतियो को प्रोत्साहन
इन कमियों को दूर करने लिए आवश्यक हैं कि शिक्षा की प्रक्रिया में समकालीन परिस्थतियों के अनुरूप परिवर्तन किया जाय । 

सामाजिक व्यवस्था के निर्माण में शिक्षा की भूमिका

सामाजिक व्यवस्था के निर्माण तथा सुधार में शिक्षा अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है क्योकि एक अच्छे समाज का निर्माण शिक्षित वर्ग द्वारा ही हो सकता है । सामाजिक व्यवस्था के निर्माण में निम्न बिन्दु महत्वपूर्ण है:| 1. सामाजिक नियंत्रण की शिक्षा :
पाठ्यक्रम में इस बात की व्यवस्था होनी चाहिए कि सामाजिक दृष्टि से वांछनीय नियमों के प्रति सभी लोगों के मन में अनुकूल भावनाएँ हो । इन अनुकूल भावनाओं को पैदा करना, शिक्षा का कार्य है ।

2. वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास :

शिक्षा के द्वारा वैज्ञानिक दृष्टिकोण का वांछनीय विकास किया जाये क्योकि वैज्ञानिक आधार की कमी से सामाजिक व्यवस्था बिगड़ने लगती है और समाज के लोग अंधविश्वास से ग्रस्त हो जाते है ।। |

3. बेकारी समाप्त करना –
शिक्षित बेरोजगार युवक बेकारी से तंग आकर हिंसा का मार्ग अपनाते है | वे समाज तथा राष्ट्र के लिए हानिकारक कार्य करते है तथा सामाजिक व्यवस्था को कमजोर बनाते है । |

4. भष्टाचार को रोकना :
भ्रष्टाचार रोकने का सबसे अच्छा उपाय यह है कि लोग अच्छी तरह यह समझ ले कि गलत तरीके से कार्य करना अनैतिक तथा सामाजिक दृष्टि से निन्दयनीय है ।। |

5. व्यावहारिक आदर्शो का – निर्धारण :

जब आदर्शो की केवल चर्चा की जाती है, उनका पालन नही किया जाता तब सामाजिक व्यवस्था कमजोर होने लगती है । अतः व्यावहारिक आदर्शों का निर्धारण करना सामाजिक व्यवस्था को बनाये रखने का एक उत्तम उपाय है ।।
6. जन्मदर पर रोक 😐 आदर्श सामाजिक व्यवस्था में देश के सभी सदस्यों के लिए भोजन, वस्त्र एवं मकान की संतोषजनक व्यवस्था होती है । लेकिन जब संसाधनों की तुलना में जन्मदर अधिक बढ़ जाती है तो बुनियादी सुविधाएँ लोगों को नही मिल पाती । अतः प्रगति के लिए जन्मदर पर रोक लगाना आवश्यक है ।। |

7. अपराधियों को सुधारना :
समाज में कई लोग ऐसे होते है जो अपनी आंतरिक दुर्बलता के कारण समाज विरोधी कार्य करने लगते है । सामाजिक दृष्टिकोण इस बात पर बल देता है कि अपराधियों को सुधारने के हर संभव प्रयास करना चाहिए ।

8. आर्थिक सम्पन्नता में वृद्धि :
सामाजिक व्यवस्था को बनाये रखने के लिए प्रमुख उपाय आर्थिक सम्पत्रता में वृद्धि करना है, अर्थात प्रत्येक समाज का यह दायित्व है कि वह अपने समाज के लोगों के लिए काम तथा रोजगार की व्यवस्था करें । शिक्षा दवारा व्यक्तियों में यह योग्यता पैदा की जा सकती हैं।

9. सामाजिक ढांचा कर्म प्रधान हो :

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *